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रोमानिया के राष्ट्रपति को करना होगा महाभियोग का सामना
बुखारेस्ट, एजेंसी
First Published:07-07-12 03:01 PM
रोमानिया की संसद ने राष्ट्रपति त्रायान बासेस्कू पर देश के संविधान के साथ खिलवाड़ करने और एकछत्रवाद को बढ़ावा देने के आरोपों में महाभियोग प्रक्रिया चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
चीन की सिन्हुआ संवाद सिमित के मुताबिक संसद के आपात सत्र में शुक्रवार को इस प्रस्ताव को 114 के मुकाबले 256 मतों से मंजूरी मिली। सत्तारूढ़ गठबंधन सोशल लिबरल यूनियन (एसएलयू) राष्ट्रपति के खिलाफ यह महाभियोग प्रस्ताव लेकर आया था।
एसएलयू नेतृत्व का कहना है कि राष्ट्रपति ने बार-बार अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संविधान एवं लोकतंत्र की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं। उन्होंने सारी शक्तियों को अपने हाथ में लेकर तानाशाही से मिलती-जुलती व्यवस्था को कायम करने का दुस्साहस किया है।
यह दूसरी बार है जब बासेस्कू के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया है। इससे पहले वर्ष 2007 में लाए गए महाभियोग प्रस्ताव से वह बच निकले थे। अब बासेस्कू को लेकर 29 जुलाई को एक जनमत संग्रह का आयोजन कराया जाएगा।
अगर इस जनमत संग्रह में 51 फीसदी अवाम ने बासेस्कू के खिलाफ मत दिया तो उन्हें राष्ट्रपति पद से हटा दिया जाएगा और अगले तीन महीनों के अंदर नए राष्ट्रपति को चुनने के लिए चुनाव कराए जाएंगे।
बासेस्कू के समर्थकों का कहना है कि प्रधानमंत्री विक्टर पोंता अपने प्रभाव में इजाफा करने के इरादे से राष्ट्रपति के खिलाफ यह महाभियोग प्रस्ताव लेकर आए हैं। बासेस्कू समर्थकों ने पोंता पर ही हमला बोलते हुए उनके रवैए को तानाशाहीपूर्ण करार दिया है।
उल्लेखनीय है कि रोमानिया में राष्ट्राध्यक्षों द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया का सामना करना कोई नई बात नहीं है। रोमानिया में वर्ष 1989 में जब साम्यवादी व्यवस्था अपने पतन की ओर अग्रसर थी तो सेना की एक विशेष समिति ने तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलाई चेचेस्कू को धन के अवैध संचय और कथित नरसंहार का दोषी पाया था और उन्हें तथा उनकी पत्नी को एक फायरिंग स्क्वैड द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया था।
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