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बातचीत का व्यापक दायरा
First Published:09-06-12 10:17 PM
प्रस्तुत पुस्तक में देसी-विदेशी कई नामी-गिरामी साहित्यिक विभूतियों के साक्षात्कार सम्मिलित हैं। हरिवंश राय बच्चन, भीष्म साहनी, नागार्जुन, मैनेजर पांडेय, हंसराज रहबर, विष्णु चंद्र शर्मा, फहमीदा रियाज और पी. बरान्निकोव से साहित्यिक और सामाजिक संदर्भों से जुड़े अनेकानेक विषयों पर की गई बातचीत कहीं बेहद गंभीर नजर आती है तो कहीं बेतकल्लुफ। वैसे भी एक कुशल साक्षात्कारकर्ता की पहचान यह होती है कि वह अपने सवालों के जरिए साक्षात्कार देने वाले को ‘कुछ और’ कहने को भी प्रेरित करे, जिसके यहां कई प्रमाण हैं। गत कुछ दशकों से समाज के बदलते परिदृश्य का आमजन की सोच पर क्या असर पड़ा है, इस पर कई विचार हमारे सामने आते हैं। कहा उन्होंने, संपादक: रामकुमार कृषक, प्रकाशक : अनामिका पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, दरियागंज, नई दिल्ली-2, मूल्य: 450 रु.
नश्वर-अनश्वर पर विचार
एक समय कादम्बिनी पत्रिका में सिलसिलेवार प्रकाशित हुए आलेखों को छह खंडों में संकलित किया गया है। काल-चिन्तन शीर्षक से प्रकाशित इन छह खंडों में राजेंद्र अवस्थी ने दिक्-काल के दायरे में मानव मस्तिष्क की सीमा और उसमें निहित कुछ बुनियादी भावों का अपने तरीके से आकलन करने का प्रयास किया है। अंतर्मन, आत्ममंथन, आत्मबोध, आत्मलोचन, अनुभूति, आत्मचिंतन शीर्षक वाली इन पुस्तकों में मुख्यत: नैतिक भावबोध सामने आते हैं। विचारों का यह स्नोत यदि एक ओर सांसारिकता के बंधनों को समझाने का प्रयास करता है तो दूसरी ओर अलौकिक भावों को जन-साधारण को आम शब्दावली के जरिए प्रेषित करने की कोशिश करता है। काल-चिन्तन (छह खंड), लेखक: राजेंद्र अवस्थी, प्रकाशक: डायमंड बुक्स, ओखला, फेज-2, नई दिल्ली-20, मूल्य: 150 रु. (प्रति पुस्तक)
संदीप जोशी भगवद्गीता की सुसंगत व्याख्या
हृदय नारायण दीक्षित की पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें गीता के श्लोकों को आधुनिक संदर्भों में समझने की कोशिश की गई है। उनके अनुसार, गीता भारत की अखंड संस्कृति का सार्वभौम उद्घोष है। पुस्तक में गीता के मूल श्लोकों का संकलन नहीं है, लेकिन सभी 700 श्लोकों का क्रमबद्ध विवेचन है। गीता पर विद्वानों ने अनेक भाष्य लिखे हैं और जनजीवन में इसकी महत्ता का मुक्तकंठ से बखान किया है। गीता में पूजा-पाठ नहीं, सतत् कर्म पर जोर है, इसलिए यह ग्रंथ सदियों से मानवता का मार्गदर्शक रहा है। लेखक ने गीता के कर्मयोग दर्शन को आधुनिक पीढ़ी के समक्ष सहज भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। पुस्तक: भगवद्गीता, लेखक: हृदय नारायण दीक्षित, प्रकाशक: लोकहित प्रकाशन, संस्कृति भवन, राजेन्द्र नगर, लखनऊ-4, मूल्य: 100 रु. समाचारों की दुनिया
‘सम्पादन कला और रूप सज्जा’ करुणा शंकर सक्सेना की महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें समाचारों के सम्पादन और उनकी प्रस्तुति के तरीके आसान भाषा में समझाए गए हैं। आधुनिक संचार साधनों ने मीडिया को उद्यम में बदला है। उपग्रह, इंटरनेट के कारण समाचारों की गति तीव्रतर होती जा रही है। अब पत्रकारों की ऐसी पौध चाहिए, जो इससे कदमताल कर सके। लेखक के अनुसार, खबर की पहली शर्त है पठनीयता। भाषा, शब्द चयन और वाक्य विन्यास भी अहम पहलू हैं। पुस्तक में सम्पादकीय विभाग के स्वरूप और कार्यप्रणाली, समाचार पत्रों में सम्पादन, रूप सज्जा, दूरदर्शन समाचार सम्पादन, रेडियो समाचार सम्पादन विषयों पर व्यापक बात है। पुस्तक: सम्पादक कला एवं रूपसज्जा, लेखक: करुणा शंकर सक्सेना, प्रकाशक: जनवाणी प्रकाशन, विश्वास नगर, दिल्ली-32, मूल्य: 300 रु.
वीरेन्द्र वत्स
एक समय कादम्बिनी पत्रिका में सिलसिलेवार प्रकाशित हुए आलेखों को छह खंडों में संकलित किया गया है। काल-चिन्तन शीर्षक से प्रकाशित इन छह खंडों में राजेंद्र अवस्थी ने दिक्-काल के दायरे में मानव मस्तिष्क की सीमा और उसमें निहित कुछ बुनियादी भावों का अपने तरीके से आकलन करने का प्रयास किया है। अंतर्मन, आत्ममंथन, आत्मबोध, आत्मलोचन, अनुभूति, आत्मचिंतन शीर्षक वाली इन पुस्तकों में मुख्यत: नैतिक भावबोध सामने आते हैं। विचारों का यह स्नोत यदि एक ओर सांसारिकता के बंधनों को समझाने का प्रयास करता है तो दूसरी ओर अलौकिक भावों को जन-साधारण को आम शब्दावली के जरिए प्रेषित करने की कोशिश करता है। काल-चिन्तन (छह खंड), लेखक: राजेंद्र अवस्थी, प्रकाशक: डायमंड बुक्स, ओखला, फेज-2, नई दिल्ली-20, मूल्य: 150 रु. (प्रति पुस्तक)
संदीप जोशी भगवद्गीता की सुसंगत व्याख्या
हृदय नारायण दीक्षित की पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें गीता के श्लोकों को आधुनिक संदर्भों में समझने की कोशिश की गई है। उनके अनुसार, गीता भारत की अखंड संस्कृति का सार्वभौम उद्घोष है। पुस्तक में गीता के मूल श्लोकों का संकलन नहीं है, लेकिन सभी 700 श्लोकों का क्रमबद्ध विवेचन है। गीता पर विद्वानों ने अनेक भाष्य लिखे हैं और जनजीवन में इसकी महत्ता का मुक्तकंठ से बखान किया है। गीता में पूजा-पाठ नहीं, सतत् कर्म पर जोर है, इसलिए यह ग्रंथ सदियों से मानवता का मार्गदर्शक रहा है। लेखक ने गीता के कर्मयोग दर्शन को आधुनिक पीढ़ी के समक्ष सहज भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। पुस्तक: भगवद्गीता, लेखक: हृदय नारायण दीक्षित, प्रकाशक: लोकहित प्रकाशन, संस्कृति भवन, राजेन्द्र नगर, लखनऊ-4, मूल्य: 100 रु. समाचारों की दुनिया
‘सम्पादन कला और रूप सज्जा’ करुणा शंकर सक्सेना की महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें समाचारों के सम्पादन और उनकी प्रस्तुति के तरीके आसान भाषा में समझाए गए हैं। आधुनिक संचार साधनों ने मीडिया को उद्यम में बदला है। उपग्रह, इंटरनेट के कारण समाचारों की गति तीव्रतर होती जा रही है। अब पत्रकारों की ऐसी पौध चाहिए, जो इससे कदमताल कर सके। लेखक के अनुसार, खबर की पहली शर्त है पठनीयता। भाषा, शब्द चयन और वाक्य विन्यास भी अहम पहलू हैं। पुस्तक में सम्पादकीय विभाग के स्वरूप और कार्यप्रणाली, समाचार पत्रों में सम्पादन, रूप सज्जा, दूरदर्शन समाचार सम्पादन, रेडियो समाचार सम्पादन विषयों पर व्यापक बात है। पुस्तक: सम्पादक कला एवं रूपसज्जा, लेखक: करुणा शंकर सक्सेना, प्रकाशक: जनवाणी प्रकाशन, विश्वास नगर, दिल्ली-32, मूल्य: 300 रु.
वीरेन्द्र वत्स
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