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नकली आभूषण बेचने वाले जौहरी को जमानत मिली
नयी दिल्ली, एजेंसी
First Published:29-06-12 06:29 PM
दिल्ली की एक अदालत ने एचसीएल के चैयरमैन शिव नाडार की पत्नी को नकली आभूषण बेचकर करोड़ों रुपये का चूना लगाते पकड़े गये जयपुर निवासी जौहरी को डेढ़ करोड़ रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट संजय शर्मा ने 50 वर्षीय गोविंद नारायण जौहरी को डेढ़ करोड़ रुपए के निजी मुचलके पर नियमित जमानत दी है। इस जौहरी पर आरोप है कि उसने शिव नाडर की पत्नी की किरण नकली रत्न जडिम्त आभूषण बेचकर ठगा था।
अदालत ने इस जौहरी को निर्देश दिया है कि वह बिना पूर्व अनुमति के देश के बाहर ना जाये। इसके पहले अदालत ने जौहरी को अंतरिम जमानत दी थी। यह जौहरी अमीर और शाही परिवारों को अपना निशाना बनाता था। पुलिस के अनुसार, वह इससे पहले जयपुर और ग्वालियर में भी इसी तरह के आठ मामलों में लिप्त रहा है।
वह 1999 में न्यू फ्रेंडस कालोनी में किरण से मिला था। खुद को जयपुर प्रमुख जौहरी बताते हुए आरोपी ने बताया था कि बहुमूल्य रत्न, नग और आभूषण बेचता है। उसने दावा किया कि वह कई सालों से दिल्ली के अमीर परिवारों और राजस्थान के राजसी परिवारों को आभूषण की आपूर्ति करता था। इस जौहरी ने नाडार दंपत्ति को पिछले 12 साल में 23 करोड़ रुपए के आभूषण बेचे थे।
इस जौहरी की कारगुजारी का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब किरण ने रत्न जडिम्त दो हार झण्डेवालान में रत्नों की जांच करने वाली प्रयोगशाला में दिखाये तो पता चला कि वे घटिया किस्म के हैं। इसके बाद किरण ने अक्टूबर, 2011 में इस जौहरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट संजय शर्मा ने 50 वर्षीय गोविंद नारायण जौहरी को डेढ़ करोड़ रुपए के निजी मुचलके पर नियमित जमानत दी है। इस जौहरी पर आरोप है कि उसने शिव नाडर की पत्नी की किरण नकली रत्न जडिम्त आभूषण बेचकर ठगा था।
अदालत ने इस जौहरी को निर्देश दिया है कि वह बिना पूर्व अनुमति के देश के बाहर ना जाये। इसके पहले अदालत ने जौहरी को अंतरिम जमानत दी थी। यह जौहरी अमीर और शाही परिवारों को अपना निशाना बनाता था। पुलिस के अनुसार, वह इससे पहले जयपुर और ग्वालियर में भी इसी तरह के आठ मामलों में लिप्त रहा है।
वह 1999 में न्यू फ्रेंडस कालोनी में किरण से मिला था। खुद को जयपुर प्रमुख जौहरी बताते हुए आरोपी ने बताया था कि बहुमूल्य रत्न, नग और आभूषण बेचता है। उसने दावा किया कि वह कई सालों से दिल्ली के अमीर परिवारों और राजस्थान के राजसी परिवारों को आभूषण की आपूर्ति करता था। इस जौहरी ने नाडार दंपत्ति को पिछले 12 साल में 23 करोड़ रुपए के आभूषण बेचे थे।
इस जौहरी की कारगुजारी का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब किरण ने रत्न जडिम्त दो हार झण्डेवालान में रत्नों की जांच करने वाली प्रयोगशाला में दिखाये तो पता चला कि वे घटिया किस्म के हैं। इसके बाद किरण ने अक्टूबर, 2011 में इस जौहरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी।
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