वरिष्ठ संवाददाता, ग्रेटर नोएडा
एक्सटेंशन में फंसे निवेशकों और किसानों ने शनिवार को पंचायत करके साझा बयान जारी किया। इन लोगों ने ऐलान किया कि अगर 10 जुलाई तक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो, निवेश और किसान मिलकर चक्का जाम करेंगे। दिल्ली के लिए आवागमन और आपूर्ति नहीं होने दी जाएगी। हालांकि, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं को वापस लेने पर सहमति नहीं बनी है।एक्सटेंशन के गौर संस चौराहे पर शनिवार की दोपहर बाद नेफोमा और किसानों की समितियों की संयुक्त बैठक हुई।
जिसमें निर्णय लिया गया कि अब दोनों पक्ष मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। हाईकोर्ट के आदेशों के संदर्भ में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को प्रकरण का त्वरित समाधान करना चाहिए। इसके लिए दोनों पक्षों के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से 26 जून को दिल्ली जाएंगे। एपसीआर प्लानिंग बोर्ड के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। एक ज्ञापन दिया जाएगा। बोर्ड को 10 जुलाई को समय दिया जाएगा। अगर 10 जुलाई तक एक्सटेंशन के विवाद को सुलझाया नहीं गया तो, दिल्ली के लिए जाने वाले सारे रास्ते बंद कर दिए जाएंगे।
दादरी एनटीपीसी से होने वाली बिजली आपूर्ति और दिल्ली-हावड़ा रेलवे लाइन बंद कर दी जाएंगी। इसके लिए बोर्ड और सरकार जिम्मेदार होंगे। किसानों की ओर से बैठक में मौजूद पतवाड़ी के प्रधान टीकम सिंह ने कहा कि ‘सबसे पहले किसानों को हाईकोर्ट के आदेशों के तहत मिलने वाले लाभ देने होंगे। उसके बाद निवेशकों को दिया जाएगा। लेकिन, यह लड़ाई दोनों पक्ष मिलकर लड़ेंगे। प्लानिंग बोर्ड इस प्रकरण को बिना वजह लटका रहा है। अगर दिए गए समय में बोर्ड ने समाधान नहीं किया तो, मजबूर होकर निवेशकों और किसानों को गंभीर कदम उठाने पड़ेंगे। हालांकि, हम लोग हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिकाओं को वापस नहीं लेगें।’ दूसरी ओर नेफोमा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा कि अभी तक किसान और निवेशक अलग-अलग संघर्ष कर रहे थे। जबकि, दोनों पक्षों के हित समान हैं। इसी कारण दोनों पक्षों ने साथ मिलकर संघर्ष करने का निर्णय लिया है। निवेशक भी हाईकोर्ट के आदेश को ध्यान में रखकर प्रकरण का समाधान चाहते हैं। किसानों की जमीन गई है, ऐसे में उन्हें प्राथमकिता पर लाभ मिलने चाहिएं।
---फंसे हुए हैं एक लाख निवेशकएक्सटेशन में काम रहीं 22 कंपनियों के प्रोजेक्ट्स में एक लाख से ज्यादा लोगों ने फ्लैट बुक करवा रखे हैं। इन लोगों ने करीब 20,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। करीब एक साल से चल रहे विवाद में लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही है।
---28 गांवों के किसान प्रभावितइस प्रकरण से प्रभावित किसानों की संख्या भी कम नहीं है। 22 गांवों के करीब 1,25,000 किसान परिवार प्रभावित हैं। करीब 2,000 याचिकाएं हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ये लोग बढ़ा मुआवजा, आबादी की जमीन, नौकरियों और स्कूलों में शिक्षा के लिए आरक्षण मांग रहे हैं।
---प्राधिकरण का निकला दिवालाइस विवाद ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण का दिवाला निकाल दिया है। प्राधिकरण करीब 6,500 करोड़ रुपए के कर्ज में दबा है। बजट तक पास नहीं हो रहा है। बैंक भी अब प्राधिकरण को कर्ज नहीं दे रहे हैं। प्राधिकरण के सामने बैंक क्रप्ट होने का खतरा मंडरा रहा है।-
--प्राधिकरण ने बोर्ड को दिया जवाबप्लानिंग बोर्ड की आपत्तियों पर विकास प्राधिकरण ने जवाब भेज दिया है। हालात स्पष्ट करने के लिए प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमा रमण चार दिन पहले ही बोर्ड के अधिकारियों से मिलकर आए हैं। सीईओ को उम्मीद है कि इस समस्या का जल्दी समाधान होक जाएगा।
---‘मं निवेशकों और किसानों से अपील करता हूं कि सबने अब तक धर्य से काम किया है। कुछ दिन और धर्य बनाए रखें। समस्या का समाधान करने के लिए प्राधिकरण और सरकार तत्पर हैं। जल्दी ही समाधान हो जाएगा। किसानों के हित प्राधिकरण के लिए सवरेपरि हैं।’रमा रमण, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, ग्रेनो