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गर्मी से बचिए, पड़ सकता है दिल का दौरा
नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता
First Published:03-06-12 10:29 PM
तेज पारा दिमाग पर असर डालता है, लेकिन गर्मी में दिल को सुरक्षित रखने के लिए दिमाग ही नहीं दिल को भी कूल रखिएं, बीते 20 दिन में बढ़ते पारे में दिल्ली में 150 मरीजों को दिल का दौरा पड़ा है, जिसे सीधे रूप से बढ़ती गर्मी और आद्रता के मौसम का असर माना जा रहा है।
मेट्रो हार्ट इंस्टीटय़ूट के चेयरमैन डॉ. पुरुषोत्तम लाल कहते हैं कि अधिक पसीना बहने की वजह से खून में उपस्थित प्लेटलेट्स आपस में जुड़ने लगती हैं, जिसकी वजह से खून गाढ़ा हो जाता है, इससे धमनियों में खून की साधारण आपूर्ति बाधित होने लगती है। जिन मरीजों को उच्च रक्तचाप और डायबिटिज की परेशानी हो उन्हें सीधे धूप में संपर्क में आने से बचना चाहिए। नेशनल हार्ट इंस्टीटय़ूट के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. ओपी यादव कहते हैं कि तेज धूप में दिल की सामान्य धड़कने असमान्य हो जाती हैं, ऐसे अवस्था में दिल को पंपिंग के लिए अधिक ऑक्सीजन और खून की जरूरत होती है। गर्मियों में मेटाबॉलिज्म कमजोर होने की वजह से दिल की जरूरत को शरीर तुरंत पूरा नहीं कर पाता और इसका असर हीट स्ट्रोक और हीट हार्ट अटैक के रूप में पड़ता है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं कि पसीने के साथ शरीर में नमक की कमी हो जाती है, जिससे दिल की धड़कन अनियंत्रित हो जाती हैं।
दिल का खतरा हैं तीन बातें
अधिक पसीना और कम पसीना- एसी में रहने वाले लोग पसीने से कम रूबरू होते हैं, जबकि शरीर के सामान्य तापमान के पसीना जरूरी है। पसीना न आने पर शरीर का हीट बाहर नहीं निकल पाता, जबकि अधिक पसीना आने पर पानी की कमी हो जाती है, दोनों ही स्थिति में दिल को अधिक पंपिंग करनी पड़ती है। पानी और नमक की कमी- साधारण मौसम की अपेक्षा धूप में कैलोरी जल्दी खत्म होती है, इससे शरीर में इलेक्ट्रोलायट का स्तर कम हो जाता है। केवल पानी ही नहीं ग्लूकोज का सेवन दिल और दिमाग को सही रख सकता है।
अधिक ब्लडप्रेशर या कम- धूप में नियमित रहने वाले यदि खाली पेट घर से बाहर निकलते हैं तो ब्लडप्रेशर कम होने से चक्कर और अचानक तेज धूप में निकलने पर ब्लडप्रेशर अधिक होने पर दिल एक मिनट में 70 से 80 की जगह 100 से 120 बार धड़कता है। इसे ही हीट हार्ट स्ट्रोक कहते हैं। क्या बरतें सावधानी
-दवाओं को चिकित्सक की सलाह पर ही बदलें
-स्थिति से तुरंत निपटने के लिए एस्प्रीन दवा ले सकते हैं
-खाने में तरल पद्धार्थो की मात्र बढ़ाई जा सकती है
-केवल पानी नहीं नमक और नीबू का प्रयोग है बेहतर
-दोपहर 12 बजे से दो बजे की सीधे धूप से बचें
अधिक पसीना और कम पसीना- एसी में रहने वाले लोग पसीने से कम रूबरू होते हैं, जबकि शरीर के सामान्य तापमान के पसीना जरूरी है। पसीना न आने पर शरीर का हीट बाहर नहीं निकल पाता, जबकि अधिक पसीना आने पर पानी की कमी हो जाती है, दोनों ही स्थिति में दिल को अधिक पंपिंग करनी पड़ती है। पानी और नमक की कमी- साधारण मौसम की अपेक्षा धूप में कैलोरी जल्दी खत्म होती है, इससे शरीर में इलेक्ट्रोलायट का स्तर कम हो जाता है। केवल पानी ही नहीं ग्लूकोज का सेवन दिल और दिमाग को सही रख सकता है।
अधिक ब्लडप्रेशर या कम- धूप में नियमित रहने वाले यदि खाली पेट घर से बाहर निकलते हैं तो ब्लडप्रेशर कम होने से चक्कर और अचानक तेज धूप में निकलने पर ब्लडप्रेशर अधिक होने पर दिल एक मिनट में 70 से 80 की जगह 100 से 120 बार धड़कता है। इसे ही हीट हार्ट स्ट्रोक कहते हैं। क्या बरतें सावधानी
-दवाओं को चिकित्सक की सलाह पर ही बदलें
-स्थिति से तुरंत निपटने के लिए एस्प्रीन दवा ले सकते हैं
-खाने में तरल पद्धार्थो की मात्र बढ़ाई जा सकती है
-केवल पानी नहीं नमक और नीबू का प्रयोग है बेहतर
-दोपहर 12 बजे से दो बजे की सीधे धूप से बचें
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