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फिल्म रिव्यूः मिस्टर भट्टी ऑन छुट्टी
विशाल First Published:18-05-12 09:47 PMLast Updated:18-05-12 10:42 PM
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खिरकार अनुपम खेर की फिल्म ‘मिस्टर भट्टी ऑन छुट्टी’ की रिलीज का इंतजार खत्म हुआ। यह फिल्म पिछले दो-तीन साल से अटकी हुई थी। शूटिंग तो बहुत पहले खत्म हो गयी थी, लेकिन रिलीज के लिए सही वक्त तलाशते-तलाशते इतना समय लग गया।

इस फिल्म के निर्देशक करन राजदान चाहे कितनी ही बार कहें कि उनकी फिल्म किसी अंग्रेजी फिल्म से प्रेरित नहीं है, लेकिन सच तो यह है कि फिल्म का मेन आइडिया, प्रमुख किरदार, यहां तक कि टाइटल तक ब्रिटिश फिल्म ‘मि. बीन्स हॉलीडे’ (2007) से लिया गया है। उस फिल्म में मुख्य भूमिका रॉवन एट्किन्सन ने निभाई थी। अनुपम खेर के हाव-भाव तक रॉवन की कॉपी लगते हैं।

जिन लोगों ने अंग्रेजी फिल्म ‘मि. बीन्स हॉलीडे’ देखी है, वो ‘मिस्टर भट्टी ऑन छुट्टी’ की शुरुआत से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि कहानी में कहां-कहां क्या-क्या कॉपी किया गया है। फिल्म के मुख्य किरदार बी. बी. भट्टी (अनुपम खेर) एक बैंक में क्लर्क हैं। वह इस बात से हैरान हैं कि उन्हें एक विदेश यात्रा का ऑफर मिला है, जिसमें हवाई यात्रा के साथ-साथ उनका रहना-खाना भी फ्री है। मजे की बात है कि उन्हें यह निमंत्रण एक कॉन्टेस्ट जीतने पर मिला है, लेकिन उन्होंने तो किसी कॉन्टेस्ट में भाग ही नहीं लिया है।

खैर, इस निमंत्रण को लेकर वह बेहद उत्सुक हैं। उन्हें इस विदेश यात्रा पर जाने के लिए अपने सपनों की दुनिया के दोस्त यानी मिस्टर बच्चन (अमिताभ बच्चन) से भी मिलने की इजाजत मिल गयी है।

यात्रा के दौरान लंदन पहुंचने पर ही उनके साथ अजीबो गरीब वाकिए शुरू हो जाते हैं। खुद से बातें करने की आदत और दूसरों पर बात-बात पर शक करने की वजह से मि. भट्टी को हर दूसरे कदम पर मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। इसी दौरान उनकी मुलाकात एलिस (एम्मा कार्ने) से होती है। यह मुलाकात उनकी यात्रा का एक हसीन पड़ाव साबित होती है। लेकिन असली मुसीबतें तब शुरु होती हैं, जब लंदन में उन्हें एक आतंकवादी समझ लिया जाता है। मिस्टर भट्टी को अब न सिर्फ खुद को बेकसूर साबित करना है, बल्कि अपने घर भी लौटना है, लेकिन ये सब इतना आसान नहीं है।

देखा जाए तो किसी फिल्म से प्रेरणा लेना या फिर उसका बेसिक आइडिया लेना कोई बुरी बात नहीं है। पर अच्छा तब रहता है, जब आप उसे मन से बनाएं और एक अच्छी मनोरंजक फिल्म में तब्दील करें। मोटे तौर पर यह एक कॉमेडी फिल्म है, लेकिन इसमें मिस्टर बीन्स के किरदार को जबरदस्ती अनुपम खेर पर हावी दिखाया गया है।

अगर अनुपम खेर रॉवन एट्किन्सन के हाव-भाव से परे अपने स्टाइल की कॉमेडी करते तो शायद यह एक टाइम पास फिल्म बन सकती थी। फिल्म की सबसे बड़ी कमी है इसकी पटकथा। मुख्य कहानी अंग्रेजी फिल्म से प्रभावित है। संवाद और ज्यादा चुटीले होने चाहिए थे।

फिल्म के हर दूसरे तीसरे सीन में इन बातों की कमी खलती दिखाई देती है। इसके अलावा अनुपम खेर को मिस्टर बीन्स के खोल से बाहर ही निकलने नहीं दिया गया है, जिसकी वजह से फिल्म के अन्य किरदारों पर से फोकस हट गया है। फिल्म मात्र कुछेक हिस्सों मे ही ठीक-ठाक लगती है। बाकी हिस्से एक-दूसरे से मेल खाते नहीं दिखते। कुल मिला कर यह एक टाइमवेस्ट मूवी है।

कलाकार: अनुपम खेर, भैरवी गोस्वामी, एम्मा कार्ने, शक्ति कपूर, पवन शंकर, संदीप गार्चा,
निर्देशक-लेखक: करन राजदान
निर्माता/बैनर: अश्विनी चोपड़ा/वाइड एंगल मीडिया, ट्यूलिप फिल्म्स
संगीत : चन्नी सिंह, सिद्धार्थ, सुहास
गीत : देव नारायण
 
 
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