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सरकार और अन्ना दोनों अड़े
नई दिल्ली हिन्दुस्तान टीम
First Published:01-08-12 01:45 AM
भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर-मंतर पर अपने सहयोगियों के साथ अनशन कर रहे अन्ना हजारे के साथ केंद्र सरकार इस दफा बातचीत के मूड में नहीं है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह किसी तरह के दबाव में नहीं आएगी। उधर, अन्ना ने भी दो टूक कह दिया है कि वह किसी मंत्री या यहां तक कि प्रधानमंत्री से भी बात नहीं करेंगे। उन्हें अब कोई आश्वासन नहीं, बल्कि लोकपाल चाहिए।
अन्ना को अनशन पर बैठे तीन दिन और उनके सहयोगियों को सात दिन हो गए हैं, लेकिन सरकार की ओर से बातचीत के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की गई है।मंगलवार को सरकार के आला सूत्रों ने साफ किया कि अन्ना व उनकी टीम के सदस्य कुछ भी करें, मगर सरकार दबाव में नहीं आएगी।
वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि लोकपाल कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है और ऐसे में टीम अन्ना से बातचीत का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत के लिए खुद उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया। सरकार के इस रुख पर अन्ना हजारे ने कहा कि वे खुद भी सरकार के किसी मंत्री से बातचीत के इच्छुक नहीं हैं। क्योंकि, वे इस बार भी सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि अब लोकपाल बनने और भ्रष्टाचार के आरोपी मंत्रियों की जांच के लिए एसआईटी का गठन होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अन्ना ने कहा कि वह पद्मश्री पुरस्कार सरकार को लौटा चुके हैं और पद्म भूषण भी वापस करने को तैयार हैं।
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