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औद्योगिक वृद्धि में तीव्र गिरावट के आसार
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:03-06-12 03:18 PM
रुपये के अवमूल्यन, महंगाई और राजकोषीय घाटे के कारण कपड़ा मशीनरी, सीमेंट और उर्वरक जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में अप्रैल-जून की तिमाही में तीव्र गिरावट की सम्भावना है। यह बात एक अध्ययन में रविवार को कही गई।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई)-एस्कॉन द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया है, ''औद्योगिक क्षेत्र के प्रदर्शन पर क्षेत्रवार विेषण ने स्पष्टरूप से संकेत दिया है कि लगभग सभी क्षेत्रों में 2012-13 की प्रथम तिमाही के दौरान निम्न उत्पादन वृद्धि की सम्भावना है।''
सर्वेक्षण में कहा गया है, ''जहां सभी वर्गो के लिए विशिष्ट एवं उच्च श्रेणियों में चंद क्षेत्र ही हैं, वहीं अधिकांश क्षत्रों की उत्पादन वृद्धि दर निम्न श्रेणी की है।''
यह सर्वेक्षण 114 क्षेत्रों में की गई है, जिनमें 35,000 से अधिक कम्पनियां हैं।
सर्वेक्षण के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक मोटर्स, अर्थमूविंग एवं निर्माण उपकरण, रबर वस्तुएं, टायर तथा कच्चा तेल जैसे क्षेत्रों में शून्य से 10 प्रतिशत की निम्न वृद्धि दर की सम्भावना है।
कपड़ा मशीनरी, ट्रांस्फार्मर एवं पम्प के क्षेत्रों में वृद्धि दर के नकारात्मक स्तर पर जाने की आशंका है।
जबकि आटोमोबाइल, ऊर्जा मीटर, बाल एवं रोलर बियरिंग तथा स्कूटर के क्षेत्रों में 10 से 20 प्रतिशत की उच्च वृद्धि दर रहेगी।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ''एस्कॉन द्वारा किए गए सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश प्रतिभागियों ने कहा कि वृद्धि दर में मंदी, मुख्यरूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए अपनाए गए सख्त मौद्रिक उपायों और वैश्विक आर्थिक मंदी के प्रभावों के कारण है, जिसके कारण मांग में भारी कमी बनी हुई है।''
बनर्जी ने कहा, ''स्थिति, सरकार और आरबीआई से ठोस प्रयास की मांग कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे पास एक समन्वित आर्थिक सुधार की योजना हो।''
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