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अतीत को भुलकर उतरेंगे भारतीय भारोत्तोलक
नई दिल्ली,एजेंसी
First Published:13-07-12 05:39 PM
आठ साल बाद ओलंपिक में वापसी कर रहे भारतीय भारोत्तोलकों पर लंदन में पदक की उम्मीद से ज्यादा खुद को डोप मुक्त रखने का दबाव होगा क्योंकि देश को पिछले लगभग एक दशक में इस खेल में डोपिंग के दंश से जूझना पड़ा है।
के रवि कुमार और एन सोनिया चानू जब लंदन में चुनौती पेश करने उतरेंगे तो उनका लक्ष्य नई शुरूआत करने का होगा। कर्णम मल्लेश्वरी (69 किग्रा) ने 2000 सिडनी खेलों में कांस्य पदक जीतकर भारतीय भारोत्तोलन में नई शुरूआत की थी, लेकिन इसके बाद देश को इस खेल में कई डोपिंग प्रकरणों का सामना करना पड़ा।
मल्लेश्वरी एथेंस में 2004 में अपनी पिछली उपलब्धि हो दोहराने में नाकाम रही जबकि कुंजरानी देवी और सनामाचा चानू भी कोई पदक नहीं जीत सकी थी। इतना ही नहीं चानू और प्रतिमा कुमारी प्रतिबंधित दवाओं के सेवन की दोषी पाई गई जिससे देश की छवि को नुकसान पहुंचा।
यह पहली बार था जब भारत का कोई खिलाड़ी ओलंपिक में डोपिंग का दोषी पाया गया था। चार साल बाद एल मोनिका देवी को भी बीजिंग का विमान पकड़ने से कुछ देकर पहले ही डोपिंग के कारण रोक दिया गया। वर्ष 2010 तक भारतीय भारोत्तोलन डोपिंग से जूझता रहा। राष्ट्रमंडल खेलों सहित अन्य प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध से बचने के कुछ दिन बाद ही सनामाचा चानू एक बार फिर नाडा के डोप टेस्ट में विफल रही थी। भारत ने हालांकि दो अंतरराष्ट्रीय निलंबन और कई व्यक्तिगत निलंबन के बाद कड़ा सबक सीखा है।
राष्ट्रमंडल खेल 2010 के दौरान राष्ट्रीय कोच हरनाम सिंह ने स्वीकार किया था कि भारोत्तोलकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टूर्नामेंट का अंत डोप मुक्त होकर करना होगा और वह खुश हैं कि इस लक्ष्य को हासिल किया जा सका। भारत ने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण सहित आठ पदक जीते थे। रवि और सोनिया हालांकि लंदन में भारत के लिए छिपे रूस्तम साबित हो सकते हैं। भारत ने दक्षिण कोरिया के प्योंगतेक में सीनियर एशियाई चैम्पियनशिप के दौरान लंदन ओलंपिक के लिए पुरुष और महिला वर्ग में एक एक कोटा हासिल किया था। रवि 69 किग्रा जबकि सोनिया 48 किग्रा वर्ग में चुनौती पेश करेंगे। भारतीय टीम पुरुष वर्ग में 134 अंक के साथ पांचवें जबकि महिला वर्ग में 93 अंक के साथ चौथे स्थान पर रही थी। एशियाई चैम्पियनशिप में कुल 175 किग्रा वजन उठाकर चौथे स्थान पर रही सोनिया नवीनतम विश्व रैंकिंग में संयुक्त 10वें स्थान पर हैं और उन्होंने कहा कि अगर वह अपनी मौजूदा फार्म बरकरार रखती हैं और 178 किग्रा वजन उठाने में सफल रहती हैं तो भारत को भारोत्तोलन में अप्रत्याशित पदक मिल सकता है।
भारत ने पुरुष भारोत्तोलन में 12 साल बाद कोटा हासिल किया है। विश्व चैम्पियनशिप में 311 किग्रा (141 और 170 किग्रा) वजन उठाकर 19वें स्थान पर रहे रवि को भरोसा है कि वह अपने प्रदर्शन में सुधार करने में सफल रहेंगे। रवि ने कहा कि वह ट्रेनिंग के दौरान 330 किग्रा वजन उठा रहे हैं और उनका लक्ष्य 27 जुलाई से शुरू हो रहे खेलों के दौरान कम से कम 335 से 337 किग्रा वजन उठाना है जो उन्हें पदक दिला सकता है।
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