मनमोहन ने उत्तराखंड को 1000 करोड़ देने का किया ऐलान बिग बॉस: सिख भावनाओं के अपमान मामले में फैसला नहीं मोदी तानाशाह हैं और राजनाथ चालाक: सुधीन्द्र कुलकर्णी ममता ने माकपा पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया दिल्ली सरकार को अफजल की फांसी की सूचना थी: केंद्र गंगा को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किये जाने की मांग उठी नीतीश ने हासिल किया विश्वास मत, कांग्रेस ने दिया साथ
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राजा भैया का होगा पॉलीग्राफ परीक्षण, अदालत की इजाजत राजा भैया का होगा पॉलीग्राफ परीक्षण, अदालत की इजाजत
बचपन में सामूहिक बलात्कार का शिकार रही सुनीता कृष्णन आज यौन हिंसा के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं। उनकी संस्था प्रज्जवला महिला सेक्स वर्करों के करीब पांच हजार बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा संभाल रही है। आगे पढे
दुनिया भर में लाखों महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार हैं। खासकर हिंसा प्रभावित इलाकों में बलात्कार की घटनाएं ज्यादा घटती हैं। लेकिन यह सिर्फ महिलाओं का मुद्दा नहीं है। आगे पढे
मैं चाहता हूं कि महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर ऐसा विरोध हो कि सरकार के बंद कान खुल जाएं। नेता इतने समझदार हो जाएं कि वे पार्टी से ऊपर उठकर देशहित में फैसले कर सकें। आगे पढे
बात काफी पुरानी है। तब मैं सिर्फ 11 साल की थी। एक दिन सुबह सोकर उठी तो पूरे घर में खुशी का माहौल था। मेरे पिता रेडियो पर बीबीसी न्यूज सुन रहे थे। आगे पढे
गरीब लोग बुद्धू होते हैं, आपको इस भ्रम से बाहर निकलना होगा। हमारे देश के गांवों व कस्बों में रहने वाले साधारण लोगों में हुनर और ज्ञान भरा पड़ा है। आगे पढे
आज मैं आपसे एक कठिन सवाल पूछने वाली हूं। एक ऐसा सवाल, जिसका जवाब आपको आहत कर सकता है। मेरा विषय है, ‘घरेलू हिंसा के रहस्य।’ आगे पढे
संविधान सभा के कार्य पर नजर डालते हुए नौ दिसंबर,1946 को हुई उसकी पहली बैठक के बाद अब दो वर्ष, ग्यारह महीने और सत्रह दिन हो जाएंगे। आगे पढे
बचपन का एक दिलचस्प किस्सा है, जिसे मैं आज तक नहीं भूला। तब मैं सात साल का था। मेरे पिता सेना में डॉक्टर थे। हम जबलपुर शहर में रहते थे। आगे पढे
मैं एक फौजी हूं। मैं जानता हूं कि डर के साथ जंग नहीं लड़ी जाती है। आप किसी भी क्षेत्र के हों, आप सबको कभी न कभी किसी मुश्किल से जूझना ही होता है। आगे पढे
अपने पिता के सामने मैंने शर्त रखी कि अपना संस्कार तभी कराऊंगी, जब मुझे दोबारा स्कूल जाने की अनुमति मिलेगी। आगे पढे
मैं आज यहां वैश्विक नागरिकों की पहली पीढ़ी से मुखातिब हूं। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे आपसे बात करने का मौका मिला। आगे पढे
हम में से ज्यादातर लोग दूसरों की अपेक्षाओं के मुताबिक अपना जीवन तय करते हैं। मसलन, जब हम स्कूल में होते हैं, तो हमारा फोकस अच्छे अंक पर होता है, इसके बाद अच्छी नौकरी, फिर शादी और बच्चे। आगे पढे
आज मुझे आपकी यूनिवर्सिटी में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं आपकी आंखों में उत्साह और आनंद देख रहा हूं। यह वाकई उत्साहजनक है। आगे पढे
पांच बार वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने वाले विश्वनाथन आनंद ने शतरंज के क्षेत्र में ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिन्हें शायद ही कोई दूसरा खिलाड़ी छू पाएगा। आगे पढे
आज इस कार्यक्रम में अनेक क्षेत्रों के तमाम अनुभवी लोग मौजूद हैं। मुझसे पहले कई लोगों ने अहम मुद्दों पर अपने विचार और अनुभव साझा किए। सच कहूं, तो मेरे पास आपसे कहने के लिए कुछ खास नहीं है। आगे पढे
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